अपनी ज़िंदगी में हम रोज़ न जाने कितने विचारों, इच्छाओं और उम्मीदों के चक्रव्यूह से गुज़रते हैं। हम अक्सर दूसरों को बदलने, समाज से सम्मान पाने और ‘लोग क्या कहेंगे’ के डर में अपनी मानसिक आज़ादी खो देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ठहरकर सोचा है कि यह सब हमारे मन का एक बारीक खेल है?
‘एहसास’ (Ehsaas) एक ऐसी जगह है जहाँ हम शांत होकर इस मन के पीछे भागना बंद करते हैं और इसके खेल को एक साक्षी (Observer) की तरह देखना सीखते हैं।