अपने मन को कैसे नियंत्रित करें

यहाँ मन को नियंत्रित करने का एक बेहद आसान और व्यावहारिक तरीका दिया गया है।

सबसे पहले आप अपने मन के सामान्य व्यवहार पर ध्यान दें। मान लीजिए, आपके भीतर एक विचार आता है कि कोई काम करना बहुत अच्छा है। लेकिन अचानक, तुरंत ही दूसरा विचार आता है कि वह काम ठीक नहीं है, बल्कि कुछ और सोचना बेहतर है। इसके बाद आपके भीतर एक द्वंद्व या खींचतान शुरू हो जाती है कि उस काम को किया जाए या नहीं।

यह सब कुछ और नहीं, बल्कि आपके दिमाग का एक खेल है। 

अपने मन को कैसे नियंत्रित करें।

आइए इसे आसानी से समझने के लिए अपने दिमाग को दो हिस्सों—पार्ट A और पार्ट B में बांटते हैं।

जब भी हमारे भीतर कोई नया विचार या इच्छा पैदा होती है, तो वह सबसे पहले पार्ट A में आती है। जब वह विचार थोड़ा गहरा हो जाता है, तो पार्ट A उस काम को करने का निर्णय ले लेता है।

ठीक उसी समय पार्ट B की एंट्री होती है, और वह पार्ट A के उस निर्णय को परखने या बदलने की कोशिश करने लगता है।

इसे इस तरह समझिए: पार्ट A आपका ‘मन’ है, और पार्ट B ‘आप खुद’ हैं—जो एक दर्शक की तरह देख रहे हैं कि पार्ट A क्या कर रहा है।

उदाहरण के लिए, अगर पार्ट A (मन) मछली खाना चाहता है, तो आप (यानी आपका सजग पार्ट B) उसे वहीं रोक सकते हैं और सही दिशा दिखा सकते हैं।

जैसे-जैसे आप ज्ञान और जागरूकता के साथ खुद को बेहतर बनाएंगे, आपका ‘पार्ट B’ (The Observer) और अधिक मज़बूत होता जाएगा। जब पार्ट B शक्तिशाली होगा , तो आप अपने ‘पार्ट A’ (मन) को बहुत आसानी से नियंत्रित कर पाएंगे।

याद रखें, आपके ‘पार्ट A’ में विचारों का आना कभी बंद नहीं होगा। उसमें अच्छे और बुरे, दोनों तरह के विचार आते रहेंगे। लेकिन इन विचारों से आपकी ज़िंदगी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा; क्योंकि आपके सभी अंतिम फ़ैसले आपके ‘सुपर पार्ट B‘ द्वारा फ़िल्टर होकर ही बाहर आएंगे। 

इस सुपर पार्ट B के पास ‘बाबा’ के विचारों और सार्वभौमिक दर्शन पर आधारित सही ज्ञान है।

इस सरल आंतरिक विज्ञान को समझकर दुनिया का हर आम इंसान अपने मन पर पूरा नियंत्रण रख सकता है।

“जब भोजन की मेज पर आपका पार्ट A स्वाद की तरफ भागे, तो तुरंत अपने पार्ट B को जगाइए। यही पार्ट B आपको पाल से बाबा (एक आम इंसान से फरिश्ते) की ओर ले जाने का असली जरिया है।”