अहसास
हर कहानी में छिपा है एक एहसास।
देर से हुआ अहसास
सुबह का समय था। स्कूल जाने वाले बच्चों की चहल-पहल पूरे मोहल्ले में फैली हुई थी। उषा अपनी लाल साइकिल और स्कूल बैग लेकर घर से बाहर निकली। गुलाबी सूट में वह हमेशा की तरह बहुत सुंदर लग रही थी। रोहित अपने घर के दरवाज़े पर खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा था। उसे देखते ही रोहित का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। वह उससे कुछ कहना चाहता था, लेकिन शब्द उसके गले में ही अटक गए। उषा बिना कुछ बोले उसके पास से गुज़र गई।
मिट्टी की कीमत
मैंने खेत नहीं बेचे थे… मैंने अपने सबसे खूबसूरत दिन बेच दिए – मनवीर का पछतावा
शाम ढल रही थी। पक्षी झुंड बनाकर अपने घोंसलों की ओर लौट रहे थे। शायद वे भी पूरे दिन की थकान के बाद अपने घर पहुँचने की जल्दी में थे।