पहला फूल
श्रेणी : दिल को छू लेने वाली कहानियाँ
शब्द : 794 l पढ़ने का समय : 6 मिनट
“जब एक फूल दूसरे फूल की तलाश में था, तब सूरज चमक उठा।”
शायद उस दिन दो अनजान दिलों को भी अपनेपन की एक छोटी-सी वजह मिलने वाली थी।
संजू नौकरी के सिलसिले में एक छोटे शहर से महानगर आया था।
शहर बड़ा था, सड़कें हमेशा भीड़ से भरी रहती थीं और हर कोई अपनी जल्दी में था। लेकिन इतनी भीड़ के बीच भी संजू को सब कुछ बहुत अकेला लगता था।
नया शहर उसके लिए बिल्कुल अनजान था।
ऑफिस से लौटने के बाद वह अपने छोटे-से कमरे में चुपचाप बैठा रहता। किसी से बात करने का मन करता, लेकिन बात करने वाला कोई नहीं था।
एक दिन उसने अपनी बालकनी में कुछ गमले रख दिए। उसने सोचा कि अकेलेपन से बचने के लिए वह पौधों की देखभाल करेगा।
हर सुबह ऑफिस जाने से पहले वह पौधों में पानी डालता। शाम को लौटकर देखता कि किसी नई पत्ती ने जन्म लिया या नहीं।
धीरे-धीरे उसे उन छोटे-छोटे पौधों से लगाव होने लगा।
कुछ दिनों बाद उसकी नज़र सामने वाली इमारत पर पड़ी।
वहाँ भी एक लड़की अपनी बालकनी में पौधे लगा रही थी।
उसका नाम रेखा था।
संजू और रेखा एक-दूसरे को जानते नहीं थे।
न कोई बातचीत हुई थी, न कभी मुलाकात।
लेकिन अब पौधों के बीच से दोनों की नज़रें कई बार मिल जाती थीं।
एक दिन रेखा ने संजू की बालकनी की तरफ देखा और उसके पौधे की सूखी पत्तियाँ देखकर पानी डालने का इशारा किया।
संजू मुस्कुरा दिया।
अगले दिन उसने भी रेखा के एक पौधे की ओर इशारा करके हाथ से पूछा,
“पानी दिया?”
रेखा ने सिर हिलाकर हाँ कर दी।
बस यहीं से उनका छोटा-सा मूक संवाद शुरू हो गया।
अब दोनों रोज़ अपने पौधों के साथ कुछ समय बिताते और कभी-कभी एक-दूसरे की बालकनी की ओर देख लेते।
धीरे-धीरे संजू ने रेखा के पौधों को पहचानना शुरू कर दिया।
उसे पता चल गया कि रेखा को छोटे सफेद फूल पसंद हैं।
रेखा ने भी देख लिया कि संजू हर नए पौधे को बहुत ध्यान से संभालता है।
दोनों ने कभी एक-दूसरे से यह नहीं कहा, लेकिन अब वे अपने पौधे एक-दूसरे के लिए उगाने लगे थे।
एक दिन संजू नर्सरी से एक छोटा पौधा लेकर आया।
रेखा ने दूर से देखा।
अगले दिन उसने भी वैसा ही पौधा खरीद लिया।
दोनों अपनी-अपनी बालकनी में खड़े होकर मुस्कुराए।
शायद अब पौधे सिर्फ़ पौधे नहीं रहे थे।
वे दोनों के बीच एक छोटा-सा रिश्ता बन गए थे।
समय बीतता गया।
एक सुबह संजू ने देखा कि उसके पौधे पर एक बड़ा लाल फूल खिल आया है।
वह बहुत खुश हुआ।
उसने फूल को देर तक देखा।
फिर उसकी नज़र सामने वाली बालकनी पर गई।
रेखा अपने पौधे के पास खड़ी थी।
उसके पौधे पर अभी तक एक भी फूल नहीं आया था।
रेखा ने संजू के पौधे पर खिले लाल फूल को देखा।
कुछ पल तक वह उसे देखती रही।
फिर उसने धीरे से आसमान की ओर देखा।
उसके चेहरे पर हल्की उदासी थी।
संजू कमरे के अंदर से उसे देख रहा था।
उसे लगा कि शायद रेखा अपने पौधे पर फूल न आने की वजह से उदास है।
उसने फूल को देखा।
फिर रेखा की ओर देखा।
कुछ देर सोचने के बाद उसने गमला उठाया और घर से बाहर निकल गया।
वह रेखा के दरवाज़े तक पहुँचा।
दरवाज़ा खुला।
रेखा उसे देखकर हैरान रह गई।
संजू ने बिना कुछ कहे वह पौधा उसकी ओर बढ़ा दिया।
रेखा ने हैरानी से पूछा,
“यह…?”
संजू हल्का-सा मुस्कुराया।
“इस पर आज पहला फूल आया है।”
रेखा ने फूल को देखा।
फिर संजू की ओर।
संजू ने धीरे से कहा,
“मैंने खुद से वादा किया था कि इस पौधे पर जब पहला फूल आएगा, तो मैं इसे तुम्हें दूँगा।”
रेखा कुछ पल तक उसे देखती रही।
उसकी आँखों में कई भाव थे।
खुशी भी।
हैरानी भी।
और शायद वह बात भी, जिसे दोनों ने कभी शब्दों में कहने की कोशिश नहीं की थी।
रेखा ने फूल को बहुत सावधानी से छुआ।
फिर संजू की आँखों में देखा।
वह कुछ कहना चाहती थी।
लेकिन शब्द उसके होंठों तक आकर रुक गए।
संजू भी चुप था।
उस छोटी-सी खामोशी में जैसे दोनों बहुत कुछ कह चुके थे।
कुछ रिश्ते अचानक नहीं बनते।
वे धीरे-धीरे उगते हैं।
एक पौधे की तरह।
हर दिन थोड़ा पानी पाकर।
थोड़ी धूप पाकर।
और सबसे ज़रूरी…
किसी के इंतज़ार से।
संजू जब वापस जाने लगा, तो रेखा ने पहली बार उसे आवाज़ दी।
“संजू…”
वह रुक गया।
रेखा ने मुस्कुराकर कहा,
“कल से मेरे पौधों को पानी देने की ज़िम्मेदारी तुम्हारी।”
संजू मुस्कुरा दिया।
“और तुम्हें मेरे पौधों का ध्यान रखना होगा।”
रेखा ने सिर हिला दिया।
दोनों हँस पड़े।
शायद उस दिन उनके बीच सिर्फ़ एक पौधे का आदान-प्रदान नहीं हुआ था।
एक अकेले शहर में दो अकेले लोगों को एक-दूसरे का साथ मिलने का अहसास हुआ था।